Debt Mutual Funds me Tax ka Bomb – stockmarketnewstoday.com

Debt Funds में टैक्स का बम

31 मार्च के बाद Debt Funds या Debt Mutual Fund जो अब तक टैक्स फ्री थे, उन पर टैक्स लगाया जाएगा…दिलचस्प बात यह है कि ये वो ‘एरिया’ है जहां अधिकतम कर्मचारी और आम निवेशक निवेश करते हैं…जी हां, ये टैक्स से अभी आम निवेशक जो म्युचुअल फंड में Debt Funds वाले सेगमेंट में निवेश करते हैं उनके ऊपर टैक्स का बोझ बढ़ाने वाला है

चलते देखते हैं क्या बिल्कुल है डेट फंड, और किस तरह से इन पर टैक्स लगेंगे 1 अप्रैल, 2023 से –

सबसे पहले हम देखेंगे कि डेट म्यूचुअल फंड होता क्या है?

Association of Mutual Funds in India (AMFI) के हिसाब से डेट फंड वो म्युचुअल फंड स्कीम है, जो फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती है, जैसे कि सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड, कॉरपोरेट डेट स्कीम, डेट सिक्योरिटीज और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे बॉन्ड , ट्रेजरी बिल, वाणिज्यिक पत्र…।

अब देखते हैं कि डेट म्युचुअल फंड से संबंधित current taxation rules नियम क्या है?

वर्तमान में, डेट म्युचुअल फंड में होल्डिंग पीरियड के हिसाब से टैक्सेशन लागू होता है..अगर 36 महीने के भीतर आप एग्जिट कर लेते हैं तो STCG (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन) के हिसाब से टैक्सेशन लगता है…जो इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से कट किया जाता है… लेकिन, अगर कोई इंडिविजुअल अपने डेट म्यूचुअल फंड में 3 साल याने की 36 महीने के बाद एग्जिट करता है तो उसका LTCG (लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स) में विचार किया जाता है..और फिर टैक्स रेट 20% के हिसाब इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ से लगता है।

अब आप सोचते हैं कि इंडेक्सेशन क्या होता है? खैर, इंडेक्सेशन में सरकारी महंगाई को करके टैक्सेशन लागू करती है, जिस इन्वेस्टर्स की टैक्स देनदारी कम हो जाती है…।

लेकिन 1 अप्रैल के बाद, ऐसा नहीं होगा…

जी हां, फाइनेंशियल बिल 2023 के संशोधन के बाद, डेट फंड में होल्डिंग पीरियड का एंगल शुद्ध तरह से खत्म हो जाएगा…। और डेट म्युचुअल फंड निवेशकों को अपने कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से ही टैक्स भरना पड़ेगा.. फिर चाहें वो शॉर्ट-टर्म 2 साल के लिए इनवेस्ट करें, फिर लॉन्ग-टर्म 3 साल से ज्यादा इनवेस्ट करें…।

इसके अलावा, उन्हें कोई इंडेक्सेशन बेनिफिट भी नहीं मिलेगा… जी हां, फाइनेंशियल बिल 2023 के संशोधन के बाद इंडेक्सेशन बेनिफिट रद्द कर दिया गया है।

अब आप सोच रहे होंगे कि इस कदम का निवेशकों पर कैसा असर पड़ेगा?

खैर, काफी लॉग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले डेट फंड मैं निवेश करता हूं ताकि उन्हें टैक्स बेनिफिट मिलें..लेकिन अब ये फायदे खत्म ही समझें… तो जो वेतनभोगी या स्वरोजगार वाले लोग हाई टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, और जो टैक्स से बचने के लिए ही डेट म्यूचुअल फंड में लॉन्ग-टर्म इनवेस्ट करते हैं, अब वो इसे आप बनाए रखेंगे…क्योंकि उन्हें अब क्या ही मिलेगा इस से…

अब जब यहां इंडेक्सेशन बेनिफिट्स भी नहीं है तो सीनियर सिटिजन डेट फंड्स को प्रेफर करते हैं अब वो फिक्स्ड डिपॉजिट में ही करना पसंद करेंगे..कॉरपोरेट भी डेट्स के बजाए इक्विटी को प्रेफरेंस देंगे…..

कुल मिलाकर, डेट फंड में ये नया रूल बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और इक्विटी म्यूचुअल फंड को इनडायरेक्ट बूस्ट देगा…

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